वोटर लिस्ट पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला! हाईकोर्ट के अधिकारी करेंगे SIR डेटा की जांच
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बेनजीर आदेश जारी किया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची में किसी भी तथ्यात्मक विसंगति की जांच अब कोलकाता उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त वर्तमान और पूर्व न्यायिक अधिकारियों द्वारा की जाएगी। यह कदम चुनाव आयोग की स्वायत्तता और राज्य प्रशासन की भूमिका के बीच एक नया संतुलन पैदा करेगा।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच ‘विश्वास की कमी’ स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि चुनाव आयोग 28 फरवरी को अपनी सूची जारी करेगा, लेकिन इसे अंतिम नहीं माना जाएगा। यदि न्यायिक अधिकारियों को कोई गड़बड़ी मिलती है, तो आयोग को अतिरिक्त सूची प्रकाशित करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई मार्च के पहले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य में एसआईआर दस्तावेजों के फटने और चुनावी हिंसा की खबरों पर कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कड़ी फटकार लगाई। आयोग के वकील ने शिकायत की कि राज्य ने हिंसा के बावजूद कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो डीजीपी को इसके परिणाम भुगतने होंगे।” कोर्ट ने डीजीपी से अब तक की गई कार्रवाई पर हलफनामा मांगा है और जिला कलेक्टरों को न्यायिक अधिकारियों के साथ सहयोग करने का आदेश दिया है।