बेटी की बोर्ड परीक्षा के लिए जेल से बाहर आएगा हत्या का दोषी पिता! ओडिशा हाईकोर्ट का मानवीय फैसला
ओडिशा हाईकोर्ट ने न्यायपालिका के मानवीय चेहरे को पेश करते हुए एक हत्या के दोषी को उसकी बेटी की १०वीं बोर्ड परीक्षा के लिए अंतरिम जमानत दे दी है। श्रीनिवास पात्र, जो २०१० के एक हत्या मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, ने अदालत से गुहार लगाई थी कि उनकी बेटी की बोर्ड परीक्षा के दौरान उसका साथ देने वाला घर पर कोई नहीं है।
अदालत की टिप्पणी: हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है और कुछ विशेष परिस्थितियों में माता-पिता का बच्चों के साथ होना आवश्यक है। श्रीनिवास ने तर्क दिया था कि उनकी बेटी का परीक्षा केंद्र घर से ५ किमी दूर है और घर में केवल बुजुर्ग दादा-दादी हैं, जो उसे लाने-ले जाने में असमर्थ हैं।
जमानत की शर्तें: अदालत ने सख्त हिदायत दी है कि यह राहत केवल अस्थायी है। आदेश के अनुसार, श्रीनिवास को १० मार्च २०२६ तक निचली अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा। कोर्ट ने साफ किया कि इस अंतरिम आदेश का मुख्य मामले की सजा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और आरोपी को जमानत की सभी अन्य शर्तों का पालन करना होगा।