जगदलपुर हत्याकांड: पुलिस की जांच से हाईकोर्ट नाराज, टीएमसी नेता की हत्या की जांच अब NIA के हवाले!

पश्चिम बंगाल के जगदल में टीएमसी नेता अशोक साऊ की हत्या के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। २०२४ में उपचुनाव के दिन हुई इस सनसनीखेज हत्या की जांच से असंतुष्ट होकर न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने मामले की जिम्मेदारी एनआईए (NIA) को सौंप दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए चल रहे ट्रायल को भी रोक दिया है।

क्या है पूरा मामला? १३ नवंबर २०२४ को जगदल थाने से महज ५० मीटर की दूरी पर टीएमसी नेता अशोक साऊ की हत्या कर दी गई थी। थाने के इतने करीब हत्या होने के बावजूद पुलिस की जांच में कई खामियां पाई गईं। हाईकोर्ट का मानना है कि पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं थी और इसमें कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है।

राजनीतिक घमासान शुरू: हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व सांसद अर्जुन सिंह ने कहा कि पुलिस की जांच में बड़ी खामियां थीं, इसलिए एनआईए को जांच मिलना जरूरी था। वहीं, स्थानीय टीएमसी विधायक सोमनाथ श्याम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एनआईए और सीबीआई का इस्तेमाल टीएमसी नेताओं को परेशान करने के लिए कर रही है। हालांकि, मृतक अशोक साऊ का परिवार इस फैसले से खुश है क्योंकि उन्हें लंबे समय से पुलिस प्रशासन से कोई सुरक्षा नहीं मिल रही थी।

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