खाते में आने लगा बकाया DA, लेकिन सरकारी कर्मचारियों ने लगाया कम पैसे मिलने का आरोप!

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने बकाया महंगाई भत्ते (DA) की पहली किस्त का भुगतान शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के बैंक खातों में पैसे जमा होने लगे हैं, लेकिन इस प्रक्रिया ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग का आरोप है कि उन्हें जो राशि मिल रही है, वह वास्तविक गणना से काफी कम है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, 31 मार्च 2026 तक बकाया डीए की पहली किस्त का भुगतान अनिवार्य है। इसके लिए वित्त विभाग ने एक विशेष पोर्टल भी लॉन्च किया था, जहां 2016 से 2019 के बीच का बकाया डेटा अपलोड किया गया। हालांकि, पश्चिम बंगाल अदालत कर्मचारी समिति के संयुक्त सचिव विनय हलदार ने आरोप लगाया कि HRMS सिस्टम में एरियर की गणना में गंभीर विसंगतियां हैं। आरोप है कि ग्रुप-सी से ग्रुप-ए तक के कर्मचारियों के बिल में यह दिखाया जा रहा है कि एरियर की राशि 1 अक्टूबर 2026 को उनके जीपीएफ खाते में जमा होगी, जो सुप्रीम कोर्ट की समय सीमा का सीधा उल्लंघन है।
समस्या उन संविदात्मक (Contractual) कर्मचारियों के लिए और भी जटिल है जिनके पास जीपीएफ खाता नहीं है। हालांकि वे ROPA 2009 के तहत डीए के हकदार हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक उन्हें भुगतान करने का कोई स्पष्ट तंत्र विकसित नहीं किया है।
इस बीच, नवान्न (राज्य सचिवालय) ने एरियर भुगतान के काम को समय पर पूरा करने के लिए कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। आज शनिवार और कल रविवार को भी वित्त और लेखा विभाग खुले रहेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ वे छुट्टी के दिन भी काम कर रहे हैं, और दूसरी तरफ उनके हक के पैसे में कटौती की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर राज्य भर के कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।