सावधान! आपकी पे-स्लिप पर होने वाला है बड़ा असर, नए लेबर कोड से बदल जाएगा वेतन का पूरा गणित

1 अप्रैल, 2026 से भारत में नौकरीपेशा लोगों के लिए वेतन और श्रम कानूनों में क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहे हैं। केंद्र सरकार के नए श्रम कोड (New Labour Code) के लागू होने से आपकी मंथली टेक-होम सैलरी, पीएफ योगदान और नौकरी छोड़ने के बाद मिलने वाले पैसों के नियमों में बड़ा फेरबदल होगा। चाहे आप 20 लोगों के स्टार्टअप में काम करते हों या 50,000 कर्मचारियों वाली बड़ी कंपनी में, ये नियम सब पर लागू होंगे।
सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदलेगा? नए नियमों के मुताबिक, आपकी ‘बेसिक सैलरी’ आपके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। अभी तक कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखती थीं ताकि उन्हें पीएफ और ग्रेच्युटी कम देनी पड़े। अब बेसिक सैलरी बढ़ने से आपका पीएफ योगदान बढ़ जाएगा, जिसका सीधा मतलब है कि हर महीने आपके हाथ में आने वाला पैसा (In-hand Salary) थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन आपकी भविष्य की बचत (Retirement Fund) काफी बढ़ जाएगी।
इस्तीफे के बाद तुरंत भुगतान: कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अब नौकरी छोड़ने के बाद अपने पैसों के लिए महीनों इंतजार नहीं करना होगा। नए नियमों के अनुसार, इस्तीफे, बर्खास्तगी या छंटनी के मात्र 2 दिनों के भीतर कंपनी को कर्मचारी का सारा बकाया (Full & Final Settlement) चुकाना होगा। हालांकि, ग्रेच्युटी के लिए 30 दिनों की समय सीमा बरकरार रहेगी।
टैक्स और विदेश यात्रा: आयकर की दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन टैक्स भरने की प्रक्रिया को और सरल बनाया गया है। वहीं, विदेश में पढ़ाई या घूमने के लिए पैसे भेजने पर लगने वाले टीसीएस (TCS) की दर को घटाकर 2% कर दिया गया है। 1 अप्रैल से प्रभावी होने वाले ये नियम आपकी वित्तीय योजना को पूरी तरह से प्रभावित करेंगे।