वोटर लिस्ट विवाद पर हाईकोर्ट पहुंचे टीएमसी नेता! चीफ जस्टिस को भेजी चिट्ठी में की गई ये बड़ी मांगें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटे जाने के मुद्दे पर राज्य में सियासी संग्राम छिड़ गया है। चुनाव आयोग द्वारा जारी सप्लीमेंट्री लिस्ट से आम नागरिकों के नाम गायब होने पर अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने मुख्य न्यायाधीश को एक विस्तृत पत्र भेजकर इस पूरी प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने का आग्रह किया है।
BDO ऑफिस और ऑफलाइन सुविधा की मांग टीएमसी की सबसे प्रमुख मांग यह है कि वोटर लिस्ट में नाम फिर से जुड़वाने के लिए केवल ‘ऑनलाइन’ प्रक्रिया पर निर्भर न रहा जाए। पार्टी का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के लोग तकनीक के साथ उतने सहज नहीं हैं, इसलिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से आवेदन करने की सुविधा दी जानी चाहिए। पत्र में प्रस्ताव दिया गया है कि जिला मुख्यालयों के अलावा हर ब्लॉक के बीडीओ (BDO) कार्यालय में भी आवेदन जमा करने की व्यवस्था की जाए, ताकि दूर-दराज के लोगों को परेशानी न हो।
रसीद और पारदर्शिता पर जोर शासक दल ने मांग की है कि ऑफलाइन आवेदन के लिए एक निश्चित फॉर्म निर्धारित किया जाए और आवेदन जमा करने के बाद नागरिक को एक सरकारी रसीद (Acknowledgement Receipt) दी जाए। इसके अलावा, ऑनलाइन पोर्टल पर दस्तावेजों को अपलोड करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों को भी दूर करने की अपील की गई है।
रोजाना रिजल्ट घोषित करने की अपील चुनाव नजदीक होने के कारण टीएमसी ने अनुरोध किया है कि ट्रिब्यूनल में चल रही अपीलों का निपटारा युद्धस्तर पर किया जाए। पार्टी ने सुझाव दिया है कि ट्रिब्यूनल के फैसलों को प्रतिदिन सार्वजनिक किया जाए ताकि मतदाताओं को तुरंत पता चल सके कि उनका नाम लिस्ट में वापस आया है या नहीं। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखी गई इस चिट्ठी ने अब चुनाव आयोग और प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है।