सुप्रीम कोर्ट की बंगाल सरकार को कड़ी फटकार! मुख्य सचिव और DGP को कारण बताओ नोटिस जारी

मालदा के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों के घेराव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार और प्रशासन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इसे ‘प्रशासनिक विफलता’ करार दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और एसपी का आचरण अत्यंत निंदनीय है।
अदालत के कड़े निर्देश: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि चुनाव आयोग को न्यायिक अधिकारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय बल (Central Forces) तैनात करने होंगे। सुरक्षा का घेरा केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके निवास स्थान पर भी बल तैनात किए जाएंगे। यदि कोई अधिकारी अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करता है, तो उस पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
जवाबदेही और पेशी: कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पत्र का संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव, डीजीपी और जिला मजिस्ट्रेट को कारण बताओ नोटिस (Show cause notice) जारी किया है। इन सभी अधिकारियों को আগামী ৬ अप्रैल दोपहर ৪ बजे ऑनलाइन माध्यम से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि सुनवाई के दौरान २-३ से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश न दिया जाए और बाहर ५ से अधिक लोगों का जमावड़ा न हो।