हलवाई की दुकान से राज्यसभा के डिप्टी लीडर तक! कौन हैं अशोक मित्तल, जिन्होंने ली राघव चड्ढा की जगह?

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल ने सबको चौंका दिया है। पार्टी ने राज्यसभा में राघव चड्ढा को ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त किया है। यह बदलाव केवल पद तक सीमित नहीं है; पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया है कि राघव चड्ढा को पार्टी के आवंटित समय में बोलने का मौका न दिया जाए। यह राघव चड्ढा के राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा सेटबैक माना जा रहा है।

अशोक मित्तल: एक प्रेरणादायक सफर अशोक मित्तल की पहचान आज शिक्षा जगत के एक बड़े नाम के रूप में है, लेकिन उनका सफर बेहद साधारण रहा है। उनके परिवार का जालंधर में मिठाई का एक छोटा सा कारोबार था। अपनी मेहनत और विजन के दम पर उन्होंने ‘लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी’ (LPU) की स्थापना की, जो आज देश के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में से एक है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और उनकी प्रोफेशनल छवि को देखते हुए अरविंद केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। अब उन्हें सदन में पार्टी के उप-नेता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

राघव चड्ढा पर क्यों गिरी गाज? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पिछले कुछ समय से पार्टी के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के दौरान राघव की चुप्पी और उनकी अनुपस्थिति ने आलाकमान को नाराज कर दिया था। कभी पार्टी के सबसे चहेते चेहरों में शुमार राघव का इस तरह हाशिए पर जाना कई सवाल खड़े कर रहा है।

अशोक मित्तल का शीर्ष नेतृत्व के करीब होना और उनकी सुलझी हुई छवि ने उन्हें इस दौड़ में आगे कर दिया। एक हलवाई की दुकान से शुरू होकर शिक्षा सम्राट और अब राज्यसभा में एक प्रमुख पद तक पहुंचने वाले अशोक मित्तल की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

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