‘बंगाल में सुपर राष्ट्रपति शासन!’ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद ममता बनर्जी का अमित शाह और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

मालदा और मुर्शिदाबाद में जजों के घेराव और हमले के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। गुरुवार को सागरदिघी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य में इस समय ‘सुपर राष्ट्रपति शासन’ जैसे हालात हैं और प्रशासनिक शक्तियां उनके हाथों में नहीं हैं।

चुनाव आयोग पर निशाना: ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की कानून-व्यवस्था अब पूरी तरह से चुनाव आयोग के नियंत्रण में है, जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारों पर काम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, “मुख्य सचिव से लेकर जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों के तबादलों ने प्रशासनिक ढांचे को तोड़ दिया है। मुझे मालदा की घटना की जानकारी रात 12 बजे पत्रकारों से मिली, जबकि प्रशासन ने मुझे अंधेरे में रखा था।”

NRC और परिसीमन का डर: मुख्यमंत्री ने एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) के बाद भाजपा राज्य में एनआरसी (NRC) और परिसीमन (Delimitation) लागू करने की कोशिश कर सकती है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष ने 1.20 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की योजना बनाई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नाकाम कर दिया। उन्होंने जनता को सतर्क करते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने पर ‘लक्ष्मी भंडार’ और ‘कृषक बंधु’ जैसी योजनाएं बंद कर दी जाएंगी।

शांति की अपील: ममता ने भाजपा पर बाहरी लोगों को बुलाकर हिंसा फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने मालदा और मुर्शिदाबाद की जनता से किसी भी उकसावे में न आने और कानून को हाथ में न लेने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा करने वालों के खिलाफ सीबीआई या एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

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