चुनाव से पहले बंगाल में बवाल! शुक्रवार से पूरे राज्य में धारा-१४४ जैसा प्रतिबंध, NIA की एंट्री

चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में हिंसा और तनाव का माहौल गहराने लगा है। पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों से आ रही अशांति की खबरों ने चुनाव आयोग की चिंता बढ़ा दी है। कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आयोग के ताजा निर्देश के अनुसार, शुक्रवार से पूरे राज्य में अवैध जमावड़े और बिना अनुमति के किसी भी प्रकार के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रशासनिक गलियारों में इस समय कोलकाता की घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। मंगलवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के बाहर हुआ हिंसक प्रदर्शन आयोग के लिए एक चेतावनी की तरह था। सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए प्रदर्शनकारियों का इस तरह आयोग के दफ्तर तक पहुंचना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। इस घटना के तुरंत बाद, आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सबसे चौंकाने वाला फैसला मालदा के कालियाचक मामले में आया है। वहां हुई गंभीर घटना की जांच अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) करेगी। चुनाव के समय किसी मामले को NIA को सौंपना यह दर्शाता है कि स्थिति कितनी संवेदनशील है। आमतौर पर राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल ही चुनाव संपन्न कराते हैं, लेकिन इस बार केंद्रीय जांच एजेंसी की सक्रियता ने राजनीतिक पारा बढ़ा दिया है।
चुनाव आयोग ने सभी जिलों के प्रशासन को सतर्क कर दिया है। शुक्रवार से लागू होने वाले नए नियमों के तहत, बिना पूर्व अनुमति के कोई भी राजनीतिक दल या संगठन रैली, सभा या जुलूस नहीं निकाल पाएगा। आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।