चुनाव आयोग का बंगाल में बड़ा एक्शन! TMC करीबियों की सुरक्षा पर चली ‘कैंची’, DGP को मिला 72 घंटे का अल्टीमेटम

पश्चिम बंगाल में चुनावों से पहले भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने पुलिस प्रशासन में बड़े फेरबदल और राजनीतिक पक्षपात को लेकर सख्त रुख अपना लिया है। आयोग ने राज्य सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षा प्रदान करना एक पेशेवर मामला होना चाहिए, न कि किसी विशेष राजनीतिक दल के प्रति निष्ठा दिखाने का जरिया।

832 करीबियों पर आयोग की पैनी नजर आयोग के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बंगाल में वर्तमान में 832 ऐसे लोगों को पुलिस सुरक्षा दी गई है जो सीधे तौर पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े हैं। इन लोगों की सुरक्षा में 2,185 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा, 144 अन्य लोगों को भी सुरक्षा मिली हुई है, जिनके बारे में शिकायतें हैं कि वे भी टीएमसी समर्थक हैं। चुनाव आयोग ने इसे ‘गंभीर त्रुटि’ माना है।

DGP को सख्त निर्देश निर्वाचन आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि अगले 2 से 3 दिनों के भीतर सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं की “कठोर पेशेवर समीक्षा” (strict professional review) की जाए। आयोग ने कहा है कि सुरक्षा केवल उन्हीं को मिलनी चाहिए जिन्हें वास्तव में खतरा है, न कि राजनीतिक प्रभाव के कारण। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इन पुलिसकर्मियों को चुनाव ड्यूटी में तैनात करने की योजना है।

चुनाव के बाद भी तैनात रहेगी केंद्रीय फोर्स बंगाल में चुनावी हिंसा के इतिहास को देखते हुए आयोग ने एक और बड़ा फैसला लिया है। मतदान और मतगणना खत्म होने के बाद भी राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 500 कंपनियां तैनात रहेंगी। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त 200 कंपनियां भी बुलाई जा सकती हैं। यह कदम चुनाव के बाद होने वाली किसी भी संभावित हिंसा को रोकने के लिए उठाया गया है।

प्रशासनिक हलचल तेज चुनाव आयोग के इस कड़े संदेश के बाद बंगाल के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डीजीपी की समीक्षा के बाद कितने ‘रसूखदारों’ की सुरक्षा कम की जाती है और आयोग की इस सख्ती का चुनाव पर क्या असर पड़ता है।

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