पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल! बीजेपी में सुनील सिंह की एंट्री, तो टीएमसी में लौटे बाबू मास्टर

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य में दलबदल का सिलसिला तेज हो गया है, जिसमें दिग्गज नेता अपनी पुरानी पार्टियों को छोड़ नई राहें चुन रहे हैं। सोमवार को राज्य की राजनीति में दो बड़े घटनाक्रम हुए जिसने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है।
अर्जुन सिंह के रिश्तेदार अब बीजेपी के पाले में: काफी समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए नोआपाड़ा के पूर्व टीएमसी विधायक सुनील सिंह ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का दामन थाम लिया है। सुनील सिंह, दिग्गज नेता अर्जुन सिंह के बहनोई हैं और पिछले साल अक्टूबर में शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद ही उनके पाला बदलने की चर्चा तेज थी। उनके साथ ही हलिशहर नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन राजू साहनी ने भी बीजेपी की सदस्यता ली। साहनी ने कहा, “तृणमूल में रहते हुए हमें जनसेवा नहीं करने दी जा रही थी, इसलिए हमने बीजेपी का रास्ता चुना।”
बाबू मास्टर की घर वापसी: उत्तर 24 परगना के बशीरहाट इलाके में बीजेपी को उस समय बड़ा झटका लगा जब कद्दावर नेता बाबू मास्टर उर्फ फिरोज कमाल गाजी वापस तृणमूल कांग्रेस में लौट आए। 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बाबू मास्टर टीएमसी छोड़कर बीजेपी में गए थे। सोमवार को जिला अध्यक्ष बुरहानुल मुकाद्दीन की मौजूदगी में उन्होंने फिर से जोड़ाफूल का झंडा थाम लिया। बाबू मास्टर का कहना है कि पिछले काफी समय से उनका बीजेपी से कोई संपर्क नहीं था।
नंदीग्राम में टीएमसी की सेंधमारी: विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के गढ़ नंदीग्राम में भी सियासी पारा चढ़ा हुआ है। शुभेंदु के करीबी नेता और उनकी पत्नी के टीएमसी में शामिल होने के बाद, अब बीजेपी की पंचायत प्रधान शिउली कर ने भी टीएमसी का हाथ थाम लिया है। शिउली कर टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर की पत्नी हैं। नंदीग्राम जैसे हाई-प्रोफाइल क्षेत्र में इस तरह के दलबदल से बीजेपी के स्थानीय संगठन में खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की लड़ाई में ये छोटे-छोटे बदलाव बड़ा असर डालेंगे।