ईरान की बर्बादी का ‘ट्रंप कार्ड’! हर दिन होगा 4000 करोड़ का नुकसान, क्या घुटने टेकेगा तेहरान?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह तबाह करने की योजना पर काम कर रहे हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को हर दिन लगभग 435 मिलियन डॉलर (करीब 4,081 करोड़ रुपये) का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी है। इस घेराबंदी से कच्चे तेल, उर्वरक और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बाधित होगी, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के पूर्व अधिकारी मियाद मालेकी ने विश्लेषण किया है कि इस कुल नुकसान में से लगभग 276 मिलियन डॉलर केवल निर्यात में गिरावट के कारण होंगे। ईरान रोजाना करीब 1.5 मिलियन बैरल तेल का निर्यात करता है, जिसकी औसत कीमत 87 डॉलर प्रति बैरल है। ईरान का 90 प्रतिशत से अधिक तेल शिपमेंट फारस की खाड़ी में खार्ग द्वीप के माध्यम से होता है, जो अब सीधे अमेरिकी निशाने पर है। हालांकि, केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के अंत तक ईरान के पास खाड़ी क्षेत्र के बाहर लगभग 154 मिलियन बैरल तेल का भंडार था, जो अल्पकालिक राहत दे सकता है।
लेकिन अमेरिका के लिए यह राह इतनी आसान भी नहीं है। एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में 16 अमेरिकी युद्धपोत तैनात होने के बावजूद फारस की खाड़ी में फिलहाल कोई बड़ा जहाज मौजूद नहीं है। समुद्री यातायात की विशाल मात्रा को देखते हुए इस नाकाबंदी को प्रभावी ढंग से लागू करना एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी सेना कितने जहाजों को जब्त कर पाती है।
इधर, ईरान ने भी अपने नुकसान का हिसाब मांगना शुरू कर दिया है। ईरानी सरकारी टेलीविजन अल-आलम अरबी के अनुसार, युद्ध के कारण ईरान को अब तक कुल 270 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत आमिर सईद इरावानी ने बहरीन, सऊदी अरब, कतर और जॉर्डन जैसे पड़ोसी देशों से मुआवजे की मांग की है। ईरान का आरोप है कि इन देशों ने अमेरिका और इजरायल को अपने सैन्य अड्डों का उपयोग करने की अनुमति दी, जिससे ईरान को भारी क्षति हुई। ट्रंप की इस ‘मैक्सिमम प्रेशर’ रणनीति ने अब मध्य पूर्व के संघर्ष को एक खतरनाक आर्थिक युद्ध में बदल दिया है।