खाली बेड और पसरा सन्नाटा! पश्चिम एशिया युद्ध ने भारत के मेडिकल टूरिज्म को दिया बड़ा झटका, 75% तक घटे मरीज

मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष का सीधा असर अब भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर दिखने लगा है। भारत के प्रमुख अस्पतालों के अनुसार, ओमान, सऊदी अरब, ईरान, इराक और यमन जैसे देशों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में 50 से 75 प्रतिशत की भारी कमी आई है। विदेशी मरीजों से गुलजार रहने वाले अस्पताल अब खाली पड़े हैं।

आंकड़ों में गिरावट और आर्थिक नुकसान FICCI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का मेडिकल टूरिज्म सेक्टर 2026 तक 13 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, 2024 में मिडिल ईस्ट से आने वाले 18% पर्यटक केवल इलाज के लिए भारत आए थे। इराक से 66,000 और मिस्र से 66,700 से अधिक मरीज भारत आए थे, लेकिन युद्ध ने इस प्रवाह को रोक दिया है। 2024 में जहां 6.44 लाख विदेशी मरीज आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 4.50 लाख के करीब रह गई है।

भारत की साख पर सवाल मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स में भारत फिलहाल दुनिया में 10वें स्थान पर है। विदेशी मुद्रा आय के मामले में भी यह क्षेत्र भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इराक और कुवैत जैसे देशों से आने वाले मरीजों की कमी के कारण सुपर-स्पेशलिटी अस्पतालों के राजस्व में भारी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध जल्द नहीं थमा, तो भारत के इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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