6 अप्रैल को आएगी फाइनल लिस्ट! बंगाल वोटर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का बड़ा कबूलनामा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले वोटर लिस्ट सुधार (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की पीठ ने चुनाव आयोग के काम करने के तरीके पर गहरी नाराजगी जताई। इसके बाद आयोग ने शीर्ष अदालत को भरोसा दिलाया कि 6 अप्रैल की रात तक सभी ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की सूची का सत्यापन पूरा कर लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की फटकार और आयोग की सफाई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, “बाकी राज्यों में SIR सामान्य रूप से हो रहा है, तो पश्चिम बंगाल में इतनी समस्याएं क्यों आ रही हैं? जहां पहले चरण में मतदान होना है, वहां के मुद्दों का निपटारा प्राथमिकता पर होना चाहिए।” आयोग ने अदालत को बताया कि 60 लाख नामों में से 47 लाख का निपटारा हो चुका है। बाकी नामों के लिए 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल का गठन किया जा रहा है, जिसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों को शामिल किया गया है।

जजों की जिलावार नियुक्ति आयोग ने 19 पूर्व न्यायाधीशों के नामों की घोषणा की है जिन्हें अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी दी गई है। कोलकाता और उत्तर 24 परगना के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणनम और पूर्व न्यायाधीश प्रदीप्त राय को नियुक्त किया गया है। पूर्व मेदिनीपुर की जिम्मेदारी पूर्व न्यायाधीश तपन सेन को मिली है, जबकि हुगली के लिए पूर्व न्यायाधीश समाप्ति चटर्जी और दक्षिण 24 परगना के लिए रंजीत कुमार बाग को चुना गया है।

अगले कदम और समयसीमा चुनाव आयोग ने बताया कि ट्रिब्यूनल में काम करने वाले अधिकारियों की ट्रेनिंग शुरू हो गई है और गुरुवार से ये ट्रिब्यूनल काम करना शुरू कर देंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अब से हर शुक्रवार को एक अपडेटेड लिस्ट जारी की जाएगी। 6 अप्रैल को आने वाली अंतिम सूची यह तय करेगी कि बंगाल के लाखों नागरिकों को 2026 के चुनाव में मतदान का अधिकार मिलेगा या नहीं।

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