होर्मुज जलडमरूमध्य पर ब्रिटेन की बड़ी बैठक! अमेरिका की गैरमौजूदगी में भारत ने दिखाई अपनी ताकत

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के कारण अवरुद्ध ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Hormuz Strait) को फिर से खोलने के लिए ब्रिटेन के नेतृत्व में आयोजित एक मेगा वर्चुअल बैठक में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ६० से अधिक देशों की मौजूदगी वाले इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने किया। इस दौरान भारत ने न केवल वैश्विक व्यापार बल्कि अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी बेहद कड़ा रुख अपनाया।
भारत का सख्त संदेश और चिंता: विदेश मंत्रालय के अनुसार, विक्रम मिश्री ने बैठक में स्पष्ट किया कि इस संकट से निकलने का एकमात्र रास्ता तनाव कम करना और कूटनीतिक संवाद है। भारत के ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों के कारण अब तक कम से कम तीन भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है। मिश्री ने बेहद दुखी स्वर में कहा, “व्यापारिक जहाजों पर हमलों में केवल भारत ने ही अपने नागरिकों को खोया है।” भारत ने समुद्र में अबाध और सुरक्षित नेविगेशन के अधिकार पर जोर देते हुए इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य बताया।
अमेरिका की दूरी और कूटनीतिक दरार: इस मेगा मीटिंग का सबसे चौंकाने वाला पहलू अमेरिका की अनुपस्थिति रही। जानकारों का मानना है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई के मुद्दे पर ब्रिटेन द्वारा वाशिंगटन का साथ न देने से अमेरिका नाराज है। इसी कूटनीतिक नाराजगी के कारण अमेरिका ने ब्रिटेन द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक से किनारा कर लिया।
भारत की सफल कूटनीति: ६ जहाज सुरक्षित निकले एक तरफ जहां अमेरिका पीछे हट गया, वहीं भारत ने अपने स्तर पर ईरान के साथ सीधे संपर्क साधकर कूटनीतिक जीत हासिल की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि नई दिल्ली लगातार ईरान के संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे। इसी संवाद का नतीजा है कि पिछले कुछ दिनों में छह भारतीय जहाज सफलतापूर्वक होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर सुरक्षित निकल चुके हैं। यह भारत की बढ़ती कूटनीतिक पकड़ का एक बड़ा प्रमाण है।