नजर लगना अंधविश्वास है या विज्ञान? जानिए क्यों बुरी नजर से डरती है पूरी दुनिया!

नया घर लेते ही परेशानी शुरू होना या बच्चे का अचानक बीमार पड़ना—भारत में इसे अक्सर ‘नजर लगना’ कहा जाता है। पश्चिम में इसे ‘ईविल आई’ (Evil Eye) के नाम से जाना जाता है। इस नजर से बचने के लिए कोई काला धागा बांधता है, तो कोई नीले मोतियों वाला तुर्की ताबीज पहनता है। लेकिन क्या किसी की आंखों में इतनी शक्ति होती है कि वह आपका नुकसान कर सके? विज्ञान और मनोविज्ञान इस बारे में क्या कहते हैं, यह जानना बेहद दिलचस्प है।

ऐतिहासिक रूप से, नजर लगने का डर प्राचीन ग्रीक और रोमन सभ्यताओं में भी मौजूद था। माना जाता है कि ईर्ष्या से भरी नजरें नकारात्मक ऊर्जा छोड़ती हैं। हालांकि, मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ‘नजर लगना’ असल में मानव मस्तिष्क की एक सुरक्षा प्रणाली है। जब जीवन में अचानक कुछ बुरा होता है और इंसान उसका कारण नहीं समझ पाता, तो वह अपनी चिंता को बाहरी शक्तियों पर थोप देता है। इसे ‘प्लेसब्बो इफेक्ट’ भी कह सकते हैं; यानी अगर आपको लगता है कि नजर उतारने से आप ठीक हो जाएंगे, तो आपका दिमाग शांत हो जाता है और आप बेहतर महसूस करने लगते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बुरी नजर के डर में जीने के बजाय समस्याओं के वास्तविक कारणों को समझना चाहिए। अक्सर तनाव और डर ही हमारी असली समस्या होते हैं, न कि किसी की नजर। यदि कोई बीमार है या लगातार असफल हो रहा है, तो टोने-टोटकों के बजाय डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना अधिक कारगर साबित होता है।

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