Digital Fatigue और स्ट्रेस बन रहे हार्ट अटैक की वजह! 25-45 की उम्र वालों को सबसे ज्यादा खतरा
बदलती जीवनशैली और काम के दबाव ने भारत को हृदय रोगों (Heart Diseases) की वैश्विक राजधानी बनाने की ओर धकेल दिया है। WHO के आंकड़ों और बीएम बिड़ला हार्ट अस्पताल की ‘बीट बाय बीट 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में होने वाली कुल हृदय रोगों से मौतों का 20% हिस्सा अकेले भारत का है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब 25 से 45 वर्ष के युवा भी इसके शिकार हो रहे हैं।
डिजिटल थकान और युवाओं पर असर: आधुनिक समय में ‘डिजिटल थकान’ और सामाजिक अलगाव हृदय रोगों के बड़े कारक बनकर उभरे हैं। लगभग 72% शहरी पेशेवर डिजिटल बर्नआउट से जूझ रहे हैं। नींद की कमी और स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से कोरोनरी जोखिम 15% तक बढ़ जाता है।
भारत में बढ़ते हार्ट अटैक के मुख्य कारण:
- गलत खान-पान: प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक और चीनी का सेवन कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है।
- तनाव: लंबे समय तक मानसिक तनाव धमनियों में सूजन पैदा करता है।
- डायबिटीज: भारत में 10 करोड़ से अधिक मधुमेह रोगी हैं, जिससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।
- प्रदूषण: जहरीली हवा धमनियों और हृदय को सीधा नुकसान पहुंचाती है।
- गतिहीन जीवन: व्यायाम की कमी और ऑफिस में घंटों बैठे रहने से दिल की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, योग और संतुलित आहार ही इस खतरे से बचने का एकमात्र रास्ता है।