केरल को मिली मंजूरी, बंगाल को मिला इंतजार! ‘बंग्ला’ नाम पर क्यों है विदेश मंत्रालय को आपत्ति?

केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की मंजूरी के बाद पश्चिम बंगाल में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। दशकों से चली आ रही मांग के बावजूद पश्चिम बंगाल का नाम बदलने का प्रस्ताव अभी भी केंद्र के पास लंबित है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी और सीपीएम के बीच समझौते के कारण केरल का प्रस्ताव स्वीकार किया गया, जबकि बंगाल को नजरअंदाज किया जा रहा है।

अड़चन कहां है? ममता सरकार ने २०১৮ में राज्य का नाम बदलकर केवल ‘बंग्ला’ (Bangla) करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित किया था। उनका मुख्य तर्क यह था कि वर्णानुक्रम (Alphabetical order) में ‘West Bengal’ अंतिम पायदान पर आता है, जिससे सरकारी बैठकों में राज्य को अपनी बात रखने का अवसर बहुत देर से मिलता है। हालांकि, केंद्र ने इसे संवैधानिक संशोधन की जरूरत बताते हुए रोक दिया है।

विदेश मंत्रालय की आपत्ति: रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेश मंत्रालय ने ‘बंग्ला’ नाम पर आपत्ति जताई है। मंत्रालय का तर्क है कि ‘बंग्ला’ नाम पड़ोसी देश ‘बांग्लादेश’ से काफी मिलता-जुलता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। संविधान के अनुच्छेद ३ के तहत संसद को नाम बदलने का अंतिम अधिकार है, लेकिन फिलहाल केरल का रास्ता साफ हो गया है और बंगाल को अभी और इंतजार करना होगा।

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