“मुझे बताए बिना ही मेरा विकल्प ले आए!” पद छिनते ही सरकार पर बरसे चिरंजीव भट्टाचार्य

पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद चिरंजीव भट्टाचार्य ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को उच्च माध्यमिक परीक्षा के अंतिम दिन उन्हें पदमुक्त कर पार्थ कर्मकार को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस फैसले से आहत होकर चिरंजीव भट्टाचार्य ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” और “अपमानजनक” करार दिया है।

चिरंजीव भट्टाचार्य के तीखे सवाल मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “परीक्षा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना एक बड़ी चुनौती थी। मुझे उम्मीद थी कि इसके लिए मुझे सराहना मिलेगी, लेकिन इसके बदले मुझे पद से हटाने का आदेश थमा दिया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनसे बिना किसी चर्चा के यह फैसला लिया है। उनका कार्यकाल अगस्त तक था, लेकिन उससे पहले ही उन्हें हटाना उनकी कार्यक्षमता पर सवाल उठाने जैसा है।

इस्तीफे के संकेत? चिरंजीव भट्टाचार्य वर्तमान में जादवপুর विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैं। सरकार के व्यवहार से वे इस कदर दुखी हैं कि उन्होंने कुलपति बने रहने पर भी संदेह जताया है। उन्होंने कहा, “मैं मानसिक रूप से बहुत आहत महसूस कर रहा हूँ। कुलपति के रूप में काम जारी रखूंगा या नहीं, इस पर बाद में फैसला लूंगा।”

क्या रही वजह? हाल ही में उच्च माध्यमिक के चौथे सेमेस्टर की गणित की परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर (Out of Syllabus) के प्रश्नों को लेकर विवाद हुआ था। इसके अलावा छात्रों को समय पर किताबें न मिलने की शिकायतें भी आम थीं। माना जा रहा है कि बोर्ड के कामकाज को लेकर लगातार हो रही आलोचनाओं के कारण ही सरकार ने यह बदलाव किया है। अब २ मार्च से पार्थ कर्मकार परिषद की कमान संभालेंगे।

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