टूट गया ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’! हमास, हिजबुल्लाह और असद के बाद अब अकेले पड़े ईरान का क्या होगा?

ईरान में अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य वहां की सत्ता को उखाड़ फेंकना था। लेकिन ईटीवी भारत के विश्लेषण के अनुसार, इस हमले ने ईरान के भीतर एक नई लहर पैदा कर दी है। जो जनता कुछ समय पहले हिजाब कानून और प्रशासनिक सख्ती के खिलाफ सड़कों पर थी, आज वही जनता विदेशी हमले के विरोध में अपनी सरकार के पीछे खड़ी नजर आ रही है। अयातुल्ला अली खमेनेई की हत्या को ईरानी नागरिक अब देश की गरिमा और संप्रभुता पर हमले के रूप में देख रहे हैं।

बिखरता गठबंधन: साल 2023 से इजरायल ने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की थी। गाजा का तबाह होना, हिजबुल्लाह के नेतृत्व का सफाया और सीरिया में असद सरकार का जाना ईरान के लिए बहुत बड़ा झटका है। तेहरान अब अपने उन मित्रों से कट चुका है जो कभी अमेरिका और इजरायल के खिलाफ उसकी ढाल हुआ करते थे। हमास अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है, जबकि हिजबुल्लाह आत्मसमर्पण और संघर्ष के बीच फंसा है।

चीन का हाथ और वैश्विक बाजार: ईरान केवल एक देश नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार का एक महत्वपूर्ण गेटवे है। चीन के ‘बेल्ट एंड रोड’ प्रोजेक्ट का हिस्सा होने के नाते, ईरान के माध्यम से ही चीनी सामान यूरोपीय बाजारों तक पहुंचता है। पश्चिमी देश ईरान पर नियंत्रण कर अंतरराष्ट्रीय ट्रेड रूट पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। इस युद्ध ने पड़ोसी मुस्लिम देशों को भी मुश्किल में डाल दिया है—वे अमेरिका का साथ दें या तटस्थ रहें, यह उनके अस्तित्व का बड़ा सवाल बन गया है।

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