‘कमल के फूलों की बोरी में भरकर बाहरियों के नाम डाले जा रहे थे!’ सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी क्यों हुईं गदगद?

पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची और एसआईआर (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को नानूर की एक जनसभा में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी ‘फॉर्म-६’ का गलत इस्तेमाल कर अवैध तरीके से बाहरी लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की कोशिश कर रही थी, जिसे अदालत ने रोक दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ममता की राहत: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिए गए आश्वासन से संतुष्ट है। अदालत ने निर्देश दिया है कि ७ अप्रैल तक सभी आपत्तियों का निपटारा किया जाए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने बिना उचित सत्यापन के किसी भी नए दस्तावेज को स्वीकार करने पर रोक लगा दी है। ममता बनर्जी ने इसे अपनी जीत बताते हुए कहा, “आज मैं खुश हूं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने न्याय किया है।”
बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ का आरोप: ममता ने सभा में दावा किया कि साजिश के तहत करीब १ करोड़ २० लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए थे। उन्होंने कहा, “मैं खुद सुप्रीम कोर्ट गई, जिसके कारण २२ लाख नाम वापस जोड़े जा सके। बाकी बचे १८ लाख लोगों को ट्रिब्यूनल जाना होगा, जिसका खर्च हम उठाएंगे।” उन्होंने ‘फॉर्म-६’ को लेकर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि कमल के फूलों की बोरी भरकर बाहरियों के नाम घुसाने की कोशिश हो रही थी, लेकिन अब कोर्ट के आदेश के बाद यह मुमकिन नहीं होगा।
अभिषेक बनर्जी ने भी चुनाव आयोग से शिकायत की थी कि बैरकपुर और पूर्वी मेदिनीपुर जैसे इलाकों में नियमों का उल्लंघन कर हजारों अवैध फॉर्म जमा किए गए हैं। ममता बनर्जी के इस बयान ने बंगाल चुनाव की सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।