स्मार्टफोन बना ‘डिजिटल ड्रग’, कर्नाटक की नई गाइडलाइन ने मचाया हड़कंप; क्या बदलेगी छात्रों की जिंदगी?

स्मार्टफोन की स्क्रीन में खोई युवा पीढ़ी को बचाने के लिए कर्नाटक सरकार ने एक बड़ी पहल की है। बढ़ती डिजिटल लत, अनिद्रा और डिप्रेशन के मामलों को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग और ‘निमहंस’ (NIMHANS) ने मिलकर एक नई गाइडलाइन तैयार की है। इसमें छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने के लिए ‘5-C’ फॉर्मूला पेश किया गया है, जो शिक्षकों को बच्चों की काउंसलिंग में मदद करेगा।
चिंताजनक आंकड़े और प्रशासन की सख्ती एक ताजा सर्वे के अनुसार, हर चार में से एक किशोर इंटरनेट की लत का शिकार है। इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि साइबर बुलिंग का खतरा भी बढ़ गया है। नए नियमों के मुताबिक, अब स्कूलों में ‘डिजिटल वेलनेस कमेटी’ बनाई जाएगी। छात्रों को दिन में एक घंटे से ज्यादा ‘स्क्रीन-टाइम’ न देने की सलाह दी गई है।
क्या है नई नीति में खास?
- नो-टेक टाइम: स्कूलों में अब एक निश्चित समय ऐसा होगा जब तकनीक का कोई इस्तेमाल नहीं होगा।
- खेलकूद पर जोर: छात्रों को इंटरनेट की दुनिया से निकालकर मैदान में वापस लाने के लिए रचनात्मक कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।
- 5-C फॉर्मूला: शिक्षकों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलावों को पहचान सकें और उन्हें सही राह दिखा सकें।
- हेल्पलाइन सुविधा: मानसिक तनाव के लिए सरकारी हेल्पलाइन ‘टेली-मानस’ (14416) की मदद ली जा सकेगी।
अभिभावकों की भी बढ़ी जिम्मेदारी गाइडलाइन में स्पष्ट कहा गया है कि बच्चों के सामने माता-पिता को भी मोबाइल का सीमित इस्तेमाल करना होगा। घर के कुछ हिस्सों को ‘फोन-फ्री’ जोन बनाने की सलाह दी गई है। कर्नाटक का यह कदम डिजिटल युग में बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।