GST कलेक्शन ने तोड़ा १० महीने का रिकॉर्ड! मार्च में सरकारी खजाने में आए २ लाख करोड़ से ज्यादा

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अप्रैल की शुरुआत एक बड़ी खुशखबरी के साथ हुई है। मार्च २०२६ में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का संग्रह २ लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर गया है। यह पिछले १० महीनों में सरकार द्वारा किया गया सबसे अधिक कर संग्रह है। पिछले साल मार्च २०२५ की तुलना में इसमें करीब ८.८ प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
१० महीने का उच्चतम स्तर: वित्त मंत्रालय द्वारा १ अप्रैल को जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च २०२६ में कुल जीएसटी संग्रह २ लाख करोड़ रुपये रहा, जो मार्च २०२५ के १.८३ लाख करोड़ रुपये से काफी अधिक है। यदि रिफंड को हटाकर ‘नेट जीएसटी’ की बात करें, तो यह ८.२ प्रतिशत बढ़कर १.७८ लाख करोड़ रुपये हो गया है। इससे पहले मई २०२५ में सरकार ने २.०१ लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड जीएसटी जमा किया था।
राज्यों का प्रदर्शन और बंगाल की स्थिति: राजस्व संग्रह के मामले में कुछ राज्यों ने असाधारण प्रदर्शन किया है। महाराष्ट्र ने १७%, कर्नाटक ने १४% और तेलंगाना ने १९% की भारी वृद्धि दर्ज की है। हालांकि, पश्चिम बंगाल के लिए आंकड़े थोड़े निराशाजनक रहे हैं। बंगाल का योगदान और वृद्धि दर केवल ३ प्रतिशत रही। दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में भी वृद्धि दर क्रमशः ३% और १% तक ही सीमित रही, जबकि मध्य प्रदेश का संग्रह स्थिर रहा।
सालाना आंकड़े और रिफंड: वित्त वर्ष २०२६ के लिए कुल जीएसटी संग्रह ८.३ प्रतिशत की वृद्धि के साथ २२.२७ लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रिफंड की प्रक्रिया में भी तेजी आई है, जो १३.८ प्रतिशत बढ़कर ०.२२ लाख करोड़ रुपये रही। सरकार के लिए सबसे राहत की बात ‘इंपोर्ट रेवेन्यू’ (IGST) में आई १७.८ प्रतिशत की उछाल है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू खपत और कड़े कर अनुपालन (Tax Compliance) के कारण जीएसटी के आंकड़ों में यह निरंतर मजबूती देखी जा रही है।