‘न्यायाधीशों का मनोबल तोड़ने की बेशर्म कोशिश’— मालदा कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार को लताड़ा

मालदा के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों को घंटों बंधक बनाने और उनके काफिले पर हमले की घटना ने सुप्रीम कोर्ट को हिलाकर रख दिया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्य कांत ने पश्चिम बंगाल को देश का ‘सबसे ध्रुवीकृत राज्य’ (Most Polarised State) करार देते हुए कहा कि यह घटना पूर्व नियोजित थी और इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को बाधित करना था।
प्रशासनिक विफलता पर कड़ी टिप्पणी: कोर्ट ने पाया कि बुधवार दोपहर ৩:৩০ बजे से घेराव शुरू हुआ, लेकिन रात ৮:৩০ बजे तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को खुद डीजीपी और गृह सचिव को फोन करना पड़ा, फिर भी डीएम या एसपी मौके पर नहीं पहुंचे। इस लापरवाही के लिए मुख्य सचिव (CS), डीजीपी और एसपी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने साफ कहा, “हम किसी को भी न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराने की इजाजत नहीं देंगे।”
केंद्रीय बल और स्वतंत्र जांच का आदेश: जस्टिस जयमाल्य बागची ने कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों को इस घटना की निंदा करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कड़े निर्देश दिए हैं:
- न्यायिक अधिकारियों, उनके परिवार और संपत्ति की सुरक्षा के लिए तुरंत केंद्रीय बलों (Central Forces) की तैनाती की जाए।
- इस पूरी घटना की निष्पक्ष जांच CBI या NIA से कराने का आदेश चुनाव आयोग को दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने राज्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे ममता सरकार की मुश्किलें बढ़ना तय है।