I-PAC पर ED का शिकंजा! कोयला घोटाले के करोड़ों रुपये क्या प्रशांत किशोर की कंपनी में पहुंचे?

पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी मामले की आंच अब मशहूर राजनीतिक सलाहकार कंपनी आईपैक (I-PAC) तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को आईपैक के हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली स्थित कार्यालयों पर एक साथ छापेमारी की। बेंगलुरु में कंपनी के सह-संस्थापक ऋषिराज सिंह के कार्यालय की भी तलाशी ली गई। इससे पहले जनवरी में कोलकाता में आईपैक के दफ्तर और निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर भी ईडी ने दस्तक दी थी।

ईडी का आरोप है कि अवैध कोयला खनन से प्राप्त लगभग 20 करोड़ रुपये हवाला के जरिए आईपैक को भेजे गए थे। जांच एजेंसी इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या इस धन का उपयोग चुनावी रणनीतियों और राजनीतिक प्रचार में किया गया था। इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए आईपैक ने एक बयान में कहा, “एक पेशेवर संस्थान के लिए यह एक कठिन और दुर्भाग्यपूर्ण दिन है। हमने जांच में पूरा सहयोग किया है और आगे भी कानून का पालन करेंगे।”

इस छापेमारी ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। ईडी ने अदालत में सनसनीखेज दावा किया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस की मदद से जांच में हस्तक्षेप किया है। एजेंसी का आरोप है कि मुख्यमंत्री के दबाव में अधिकारियों को तलाशी रोकने के लिए मजबूर किया गया और महत्वपूर्ण डिजिटल दस्तावेजों को मौके से हटा दिया गया। ईडी ने अब अदालत से सुरक्षा की गुहार लगाई है ताकि जब्त किए गए डेटा के साथ छेड़छाड़ न की जा सके।

आईपैक ने अब तक भाजपा, कांग्रेस, टीएमसी, आप और डीएमके जैसी बड़ी पार्टियों के लिए काम किया है। ऐसे में कोयला घोटाले के तार इस संस्था से जुड़ना राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहा है। क्या यह छापेमारी बंगाल की राजनीति में किसी बड़े भूचाल का संकेत है? ईडी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि कोयला तस्करी मामले की जड़ें बहुत गहरी हैं और आने वाले दिनों में कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

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