अमेरिका के गैस पाइपलाइनों पर अरब का कब्जा! 2.25 बिलियन डॉलर की मेगा डील से दुनिया हैरान

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच, वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक ऐतिहासिक बदलाव आ रहा है। मध्य पूर्व के देश अब केवल कच्चा तेल बेचने तक सीमित नहीं हैं; वे अब अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे (Energy Infrastructure) के मालिक बनने की राह पर हैं। ‘oilprice.com’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की एक प्रमुख निवेश फर्म ने अमेरिका की महत्वपूर्ण ऊर्जा संपत्तियों में लगभग 2.25 बिलियन डॉलर का भारी निवेश किया है।
अबू धाबी स्थित निवेश कंपनी ‘2PointZero’ (टुपॉइंटजीरो) ने अमेरिकी कंपनी ‘ट्रैवर्स मिडस्ट्रीम पार्टनर्स’ की 100% हिस्सेदारी खरीदने के लिए एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कंपनी का नेतृत्व अबू धाबी के उप-शासक शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान कर रहे हैं। इस सौदे के बाद, यूएई स्थित इस कंपनी का अमेरिका के रणनीतिक प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों पर सीधा नियंत्रण हो जाएगा। इसमें ‘रोवर पाइपलाइन’ और ‘ओहियो रिवर सिस्टम’ जैसे प्रमुख नेटवर्क शामिल हैं, जो अमेरिका और कनाडा के बीच गैस परिवहन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच यह निवेश कोई सामान्य व्यापारिक सौदा नहीं है। यह एक सोची-समझी रणनीति है जिसके तहत खाड़ी देश भविष्य में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की चाबी अपने पास रखना चाहते हैं। यूएई ने अगले 10 वर्षों में अमेरिका में लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। वहीं, अबू धाबी की राष्ट्रीय तेल कंपनी ‘एडनॉक’ (ADNOC) भी अपनी नई निवेश शाखा ‘XRG’ के माध्यम से अमेरिकी गैस और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है।
इस रेस में सऊदी अरब भी पीछे नहीं है। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ ने 2025 के अंत तक अमेरिकी कंपनियों के साथ 30 बिलियन डॉलर से अधिक के 17 नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व के देश अब केवल तेल के सप्लायर नहीं, बल्कि दुनिया के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के ‘मालिक’ बनने की ओर बढ़ रहे हैं। यह कदम भविष्य में न केवल वैश्विक राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि अमेरिका की घरेलू ऊर्जा नीति पर भी अरब देशों का प्रभाव बढ़ा देगा।