मिशन २०२६: बंगाल की सत्ता के लिए बीजेपी ने कसी कमर, क्या कूचबिहार बनेगा जीत का प्रवेश द्वार?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव २०२६ के लिए राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। इस बार राज्य में केवल दो चरणों में मतदान होगा—पहला चरण २३ अप्रैल (१५२ सीटें) और दूसरा चरण २९ अप्रैल (१४२ सीटें)। बीजेपी के लिए यह चुनाव ऐतिहासिक महत्व रखता है क्योंकि पार्टी पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। हालांकि, ममता बनर्जी की टीएमसी (TMC) को उनके गढ़ में मात देना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इतिहास और २०२४ के झटके से सबक: २०२१ के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी सीटों की संख्या ३ से बढ़ाकर ७७ कर दी थी। उत्तर बंगाल के ५४ निर्वाचन क्षेत्रों में से ३० पर जीत दर्ज कर बीजेपी ने अपनी मजबूत पकड़ दिखाई थी। लेकिन २०२४ के लोकसभा चुनावों ने बीजेपी को सतर्क कर दिया है। कूचबिहार सीट पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री निशित प्रमाणिक की हार ने पार्टी को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।
पीएम मोदी की रैली और नई रणनीति: बीजेपी अपने चुनाव अभियान की शुरुआत उत्तर बंगाल से कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ५ अप्रैल को कूचबिहार के रास मेला मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। खास बात यह है कि बीजेपी ने इस बार टिकट वितरण में बड़े बदलाव किए हैं। निशित प्रमाणिक, जो पहले दिनहाटा से चुनाव लड़े थे, अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित ‘माताभांगा’ सीट से चुनावी मैदान में हैं। कूचबिहार दक्षिण, तूफानगंज और सीतलकुची जैसी सीटों पर भी नए चेहरों को मौका दिया गया है।
चुनौतियां और स्थानीय समीकरण: टीएमसी कूचबिहार और मालदा जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। बीजेपी के भीतर टिकटों के इस बड़े फेरबदल से कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष भी देखा जा रहा है। हालांकि, आरएसएस (RSS) के बढ़ते प्रभाव और राजबंशी, मेच व कोच समुदायों के बीच अपनी पैठ के भरोसे बीजेपी जीत की उम्मीद लगाए बैठी है। ४ मई को होने वाली मतगणना यह तय करेगी कि बंगाल में ममता की हैट्रिक के बाद क्या ‘परिवर्तन’ होगा या टीएमसी का कब्जा बरकरार रहेगा।