“देश के रक्षकों के साथ संस्थागत अन्याय!” CAPF बिल पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए ‘सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल, २०२६’ पर कड़ा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का उदाहरण देते हुए इस प्रस्तावित कानून को जवानों के मनोबल को तोड़ने वाला बताया। उन्होंने एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि जो जवान देश के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं, व्यवस्था उनके प्रति अपनी आंखें बंद कर लेती है।

अजय मलिक का संघर्ष: राहुल ने लिखा, “नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में आईईडी ब्लास्ट के दौरान अजय मलिक ने अपना एक पैर खो दिया। १५ वर्षों की शानदार सेवा के बावजूद उन्हें न तो पदोन्नति मिली और न ही अपनी फोर्स का नेतृत्व करने का अधिकार। ऐसा इसलिए क्योंकि शीर्ष पद केवल आईपीएस अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं।” राहुल के अनुसार, यह लाखों सीएपीएफ जवानों के साथ हो रहा एक बड़ा धोखा है जो सीमाओं पर तैनात रहकर देश की रक्षा करते हैं।

विवाद की जड़ क्या है? नए बिल के अनुसार, सीएपीएफ (CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB) के आईजी रैंक के ५०% और एडीजी रैंक के कम से कम ६७% पद प्रतिनियुक्ति (Deputation) के माध्यम से भरे जाएंगे, जिसका सीधा लाभ आईपीएस अधिकारियों को मिलेगा। राहुल गांधी का तर्क है कि यह व्यवस्था उन अधिकारियों के करियर को बाधित करती है जो जमीन पर लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के बावजूद सरकार इस अन्याय को कानूनी जामा पहनाने पर तुली है।

राहुल गांधी का संकल्प: राहुल गांधी ने कहा कि सीएपीएफ जवानों का मनोबल गिरना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने वादा किया, “कांग्रेस पार्टी स्पष्ट रूप से प्रतिबद्ध है कि हमारी सरकार आते ही इस भेदभावपूर्ण कानून को रद्द कर दिया जाएगा। जो देश के लिए लड़ते हैं, नेतृत्व का पहला हक उन्हीं का होना चाहिए।”

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