मालदा हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रहार: मुख्य सचिव और DGP को कारण बताओ नोटिस, CBI जांच के आदेश!

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक स्थित मोथाबाड़ी में हुई हिंसा ने देश के सर्वोच्च न्यायालय को हिलाकर रख दिया है। चुनाव के बीच न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले और उन्हें घंटों बंधक बनाए जाने की घटना को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने इसे सीधे तौर पर न्यायपालिका की गरिमा को चुनौती देने वाला कृत्य बताया है।

प्रशासनिक अधिकारियों पर गिरी गाज: सुप्रीम कोर्ट ने इस सुरक्षा चूक के लिए राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), मालदा के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को कारण बताओ (Showcause) नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सवाल किया है कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन विफल क्यों रहा? इन सभी अधिकारियों को 6 अप्रैल को होने वाली वर्चुअल सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

CBI या NIA करेगी जांच: शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस गंभीर मामले की जांच अब स्थानीय पुलिस के हाथ में नहीं रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस तांडव की जांच सीबीआई (CBI) या एनआईए (NIA) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए। चुनाव आयोग तय करेगा कि कौन सी एजेंसी जांच का जिम्मा संभालेगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच की रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी।

क्या है पूरा मामला? बुधवार को मोथाबाड़ी में एसआईआर (SIR) सूची में नाम न होने के विरोध में प्रदर्शन शुरू हुआ था, जिसने हिंसक रूप ले लिया। उपद्रवियों ने गाड़ियों में आग लगा दी और भारी तोड़फोड़ की। इस दौरान 3 महिला अधिकारियों समेत 7 न्यायिक अधिकारियों को सुबह से आधी रात तक बंधक बनाकर रखा गया। आधी रात को केंद्रीय बलों ने उन्हें रेस्क्यू किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले का पीछा भी किया।

मुख्य न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी: मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कड़े शब्दों में कहा, “यह केवल न्यायिक अधिकारियों को डराने का प्रयास नहीं है, बल्कि अदालत के अधिकार को चुनौती देने की एक सोची-समझी साजिश है।” जस्टिस जयमाल्य बागची ने भी सुरक्षा की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर डालते हुए इसे अनिवार्य बताया।

कोर्ट के नए दिशा-निर्देश:

  1. जहां SIR का काम चल रहा हो, वहां 5 से अधिक व्यक्तियों के जमा होने पर पाबंदी होगी।
  2. राज्य के सभी 700 न्यायिक अधिकारियों को केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्य पुलिस द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
  3. अधिकारियों के कार्यस्थल और आवास पर भी केंद्रीय बलों का पहरा रहेगा।
  4. यदि अधिकारियों के परिवार को असुरक्षा महसूस होती है, तो उन्हें भी सुरक्षा घेरा दिया जाएगा।

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