मोथाबाड़ी में आधी रात को तांडव! जजों के घेराव से मचा हड़कंप, ममता और सुकांत में जुबानी जंग

मालदा के मोथाबाड़ी में बुधवार को हुई हिंसक घटनाओं ने राज्य की सियासत में उबाल ला दिया है। सुबह महिलाओं के विरोध प्रदर्शन से शुरू हुआ यह मामला शाम होते-होते रणक्षेत्र में बदल गया। उग्र भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को घेर लिया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में केंद्रीय बलों को बुलाना पड़ा। आधी रात को कड़ी सुरक्षा के बीच इन अधिकारियों को वहां से निकाला जा सका।
इस घटना पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए वैष्णवनगर की सभा में कहा, “आज बंगाल को बदनाम कर दिया गया। हालांकि कानून-व्यवस्था अभी मेरे हाथ में नहीं है, यह चुनाव आयोग के पास है।” दूसरी ओर, भाजपा ने इस हिंसा के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री के पिछले बयानों को जिम्मेदार ठहराया है। भाजपा सांसद सुकांत मजूमदार ने तंज कसते हुए कहा, “यह सब मुख्यमंत्री की योजना है। उनके उकसावे के कारण ही जनता ने कानून को हाथ में लिया।”
विवाद की जड़ मुख्यमंत्री का वह बयान है जो उन्होंने २५ मार्च को डबग्राम की सभा में दिया था। उन्होंने कहा था, “अगर बाहर से एजेंसियां आएं, तो माताएं-बहनें आगे रहें। आप जानते हैं कि किससे क्या करना है।” भाजपा का आरोप है कि इसी तरह की टिप्पणियों ने भीड़ को उकसाया। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सागरदिघी की सभा से संदेश दिया कि लोग किसी भी उकसावे में न आएं, क्योंकि कानून हाथ में लेने पर सीबीआई या एनआईए जैसी एजेंसियां उन्हें गिरफ्तार कर सकती हैं।