ईरानी चक्रव्यूह को तोड़ेगा मोदी का IMEC! दुनिया को तेल संकट से बचाएगा भारत का मेगा प्रोजेक्ट

पश्चिम एशिया में युद्ध के बादलों के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में खाड़ी देश अब ईरान के नियंत्रण वाले हर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। इस संकट के बीच पूरी दुनिया की नजरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समर्थित ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) पर टिकी हैं। भारत की यह दूरदर्शिता अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनकर उभर रही है।

हर्मुज दशकों से वैश्विक तेल व्यापार की लाइफलाइन रहा है, लेकिन हालिया तनाव ने इस संकीर्ण जलमार्ग को असुरक्षित बना दिया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यहां मामूली सी रुकावट भी कुछ ही दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को ठप कर सकती है। इस खतरे को भांपते हुए अमेरिका समर्थित IMEC प्रोजेक्ट अब चर्चा के केंद्र में है। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह कॉरिडोर मध्य पूर्व के रास्ते भारत को सीधे यूरोप से जोड़ेगा। पीएम मोदी ने पिछले महीने अपनी इजरायल यात्रा के दौरान IMEC और I2U2 के तहत सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया था, जो अब रंग लाता दिख रहा है।

रणनीतिक बदलाव के इस दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी खाड़ी देशों को अपने मार्ग सुरक्षित करने और नियंत्रण बढ़ाने का स्पष्ट संदेश दिया है। वहीं, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का मानना है कि लंबी अवधि की शांति केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव (जैसे पाइपलाइन बिछाकर ईरान के रास्ते को छोड़ना) से ही संभव है। सऊदी अरब ने पहले ही ‘पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन’ के जरिए लाल सागर तक तेल पहुंचाकर एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है। हाइफा बंदरगाह के माध्यम से अरब प्रायद्वीप को भूमध्य सागर से जोड़ने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है। स्पष्ट है कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में एक शक्तिशाली विश्व नेता के रूप में स्थापित हो चुका है।

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