सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से टला संकट! कांग्रेस प्रत्याशी मोत्ताकिन आलम को मिली हरी झंडी, लड़ पाएंगे चुनाव!

पश्चिम बंगाल के मालदा में कांग्रेस प्रत्याशी और पूर्व विधायक मोहम्मद मोत्ताकिन आलम के नामांकन पर मंडरा रहे खतरे के बादल छंट गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के कड़े निर्देश के बाद ट्रिब्यूनल ने कुछ ही घंटों में मामले का निपटारा कर दिया। मोत्ताकिन ने अपने सभी दस्तावेज सही पाए जाने के बाद आखिरकार राहत की सांस ली है।

दस्तावेजों की लड़ाई और प्रशासन की आपत्ति प्रशासन ने मोत्ताकिन के नाम पर ‘तार्किक विसंगति’ (Logical Discrepancy) का आरोप लगाते हुए उनका नाम रोक दिया था। एआईआरओ (AIRO) का कहना था कि मोत्ताकिन के दस्तावेजों में उनके पिता के नाम की स्पेलिंग अलग-अलग है और पिता-पुत्र की आयु में ५० वर्ष का अंतर है। मोत्ताकिन ने इसके जवाब में पासपोर्ट, पैन कार्ड, आधार कार्ड और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का एडमिट कार्ड पेश किया था।

अदालत और ट्रिब्यूनल का रुख ट्रिब्यूनल ने पाया कि भले ही मोत्ताकिन के पिता का नाम कहीं ‘अली मोहम्मद’ तो कहीं ‘वली मोहम्मद’ दर्ज था, लेकिन सभी दस्तावेजों पर वोटर कार्ड नंबर एक ही था। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि पहचान सुनिश्चित होने पर स्पेलिंग का छोटा अंतर मायने नहीं रखता। आयु के अंतर पर ट्रिब्यूनल ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी वोटर के माता-पिता की उम्र पर सवाल उठाना प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है और यह नाम काटने का आधार नहीं हो सकता।

राजनीतिक पहचान मोत्ताकिन आलम २०१६ में मानिकचक से विधायक रह चुके हैं और उनका परिवार १९७१ से मालदा में पंजीकृत मतदाता है। ट्रिब्यूनल के इस फैसले के बाद उनका नाम मतदाता सूची में शामिल करने का निर्देश दे दिया गया है, जिससे उनके चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हो गया है।

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