केंद्र और राज्य के बीच खत्म होगा सैलरी का फासला? जानें 7th Pay Commission लागू होने पर कितना होगा फायदा

पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। राज्य सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के गठन की घोषणा के बाद से कर्मचारियों में भारी उत्साह है। पिछले कई वर्षों से राज्य के कर्मचारी छठे वेतन आयोग के ढांचे के तहत वेतन पा रहे थे, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को बहुत पहले ही सातवें वेतन आयोग का लाभ मिल चुका है। अब इस नए कदम से वेतन विसंगति (Salary Disparity) दूर होने की उम्मीद जगी है।

कितनी बढ़ेगी सैलरी? सातवें वेतन आयोग में सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘फिटमेंट फैक्टर’ होता है। केंद्र में इसे २.৫৭ गुना रखा गया था। यदि पश्चिम बंगाल सरकार भी इसी फिटमेंट फैक्टर को अपनाती है, तो मूल वेतन (Basic Pay) में जबरदस्त उछाल आएगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का वर्तमान मूल वेतन १०,০০০ रुपये है, तो नए ढांचे में यह बढ़कर २५,৭০০ रुपये हो सकता है। जानकारों का मानना है कि डीए (DA), एचआरए (HRA) और अन्य भत्तों को मिलाकर कुल वेतन २ से २.৫ गुना तक बढ़ सकता है। यानी जो कर्मचारी अभी ৩০,০০০ रुपये कमा रहे हैं, उनकी सैलरी ६०,০০০ से ७०,০০০ रुपये के बीच पहुँच सकती है।

डीए और अन्य भत्तों पर असर: वर्तमान में राज्य के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) केंद्र की तुलना में काफी कम है। जहां केंद्रीय कर्मचारी लगभग ५०% डीए पा रहे हैं, वहीं राज्य के कर्मचारी कानूनी लड़ाई के बाद भी काफी पीछे हैं। सातवें वेतन आयोग के लागू होने से न केवल मूल वेतन बढ़ेगा, बल्कि भत्तों की गणना भी नए सिरे से होगी, जिससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार होगा।

हालांकि, राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए इस आयोग को लागू करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इससे सरकारी खजाने पर हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। कर्मचारी संगठन लगातार केंद्र के समान वेतन की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस नए वेतन ढांचे को कब तक पूरी तरह धरातल पर उतारती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *