सीटों के बंटवारे पर अलीमुद्दीन स्ट्रीट में घमासान! क्या नौशाद सिद्दीकी की वजह से टूटेगा पुराना गठबंधन?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान से पहले ही वाम मोर्चे (Left Front) के भीतर दरारें गहरी होने लगी हैं। सीटों के बंटवारे और नौशाद सिद्दीकी की पार्टी आईएसएफ (ISF) को गठबंधन में शामिल करने को लेकर माकपा (CPM) और उसके पुराने सहयोगियों के बीच खींचतान शुरू हो गई है। फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रदेश सचिव नरेन चटर्जी ने तीखे तेवर दिखाते हुए कहा है कि केवल नाम में ‘सेकुलर’ शब्द जोड़ लेने से कोई पार्टी धर्मनिरपेक्ष नहीं हो जाती।
सूत्रों के मुताबिक, अलीमुद्दीन स्ट्रीट में चल रही बैठकों में फॉरवर्ड ब्लॉक और सीपीआई जैसे सहयोगियों ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। फॉरवर्ड ब्लॉक ने जहां 21 सीटों पर दावा ठोका है, वहीं सीपीआई भी 20 के करीब सीटें चाहती है। सबसे ज्यादा विवाद उत्तर और दक्षिण 24 परगना की सीटों को लेकर है। बादुड़िया, आमडांगा और हाड़ोवा जैसी सीटों पर आईएसएफ अपना दावा जता रही है, जबकि स्थानीय माकपा नेतृत्व इन सीटों को छोड़ने को तैयार नहीं है।
दक्षिण 24 परगना की सोनारपुर उत्तर और सोनारपुर दक्षिण सीटों पर भी माकपा और सीपीआई के बीच ठन गई है। पार्टी के भीतर यह डर सता रहा है कि अगर ऊपर से फैसला थोपा गया, तो स्थानीय कार्यकर्ता चुनाव में सक्रिय नहीं होंगे या भीतरघात (Sabotage) कर सकते हैं। नौशाद सिद्दीकी हालांकि गठबंधन के प्रति सकारात्मक दिख रहे हैं, लेकिन फॉरवर्ड ब्लॉक की ‘एलर्जी’ ने वामपंथी एकता के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि 28 फरवरी को मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन से पहले अलीमुद्दीन स्ट्रीट इस ‘शारिकी संकट’ का क्या समाधान निकालती है।