“भारत दलाली नहीं करेगा!” मिडिल ईस्ट संकट के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान

मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत का रुख दुनिया के सामने साफ कर दिया है। बुधवार को संसद में आयोजित एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “भारत किसी भी तरह से ‘दलाल राष्ट्र’ (Broker State) के रूप में कार्य नहीं करेगा।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है।

पाकिस्तान की ‘मध्यस्थता’ पर प्रहार: यह बैठक उस समय हुई जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद को एक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश की है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की पर्दे के पीछे से कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। इसी पर पलटवार करते हुए जयशंकर ने साफ किया कि भारत किसी का पक्ष लेने या बिचौलिया बनने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहेगा।

युद्ध के हालात और भारत की रणनीति: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद यह संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर गया है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक रही है और सैन्य कार्रवाई फिलहाल 5 दिनों के लिए टाल दी गई है, लेकिन तनाव बरकरार है। राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद थीं। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन वह अपनी भूमिका एक संतुलित शक्ति के रूप में देखता है, न कि किसी के मोहरे के रूप में।

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