बेरोजगारी पर प्रहार: देश में कम हुई बेरोजगारों की फौज, महिलाओं की भागीदारी ने रचा नया इतिहास!

भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) 2025’ के अनुसार, देश में बेरोजगारी की दर में गिरावट दर्ज की गई है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए समग्र बेरोजगारी दर पिछले वर्ष के 3.2% से घटकर अब 3.1% पर आ गई है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग में रोजगार के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।
इस सर्वेक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धि कार्यबल में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण भारत में महिलाओं की बेरोजगारी दर केवल 2.1% है, जो इसी क्षेत्र के पुरुषों (2.6%) की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाती है। लगभग 11 लाख से अधिक लोगों पर किए गए इस अध्ययन से पता चलता है कि देश की आर्थिक प्रगति में महिलाओं की भूमिका अब और भी मजबूत हो गई है।
रिपोर्ट का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू नौकरियों की गुणवत्ता में सुधार है। अब लोग स्वरोजगार (Self-employment) के बजाय नियमित वेतन वाली नौकरियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। नियमित वेतन वाली नौकरियों की दर 22.4% से बढ़कर 23.6% हो गई है। वेतन के मामले में भी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है; नियमित वेतन पाने वाले पुरुषों की औसत मासिक आय 5.8% बढ़कर 24,217 रुपये हो गई है, जबकि महिलाओं की आय में 7.2% की शानदार वृद्धि हुई है, जो अब 18,353 रुपये तक पहुंच गई है।
क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि हालांकि कृषि अब भी सबसे बड़ा नियोक्ता है, लेकिन विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा (Service) क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भागीदारी 11.6% से बढ़कर 12.1% हो गई है। यह बदलाव संकेत देता है कि भारत अब एक मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है।