वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब वोट देने का अधिकार खत्म होना नहीं! सुप्रीम कोर्ट का बंगाल पर बड़ा फैसला

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मचे ‘वोटर लिस्ट’ घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और राहत भरा बयान दिया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटने या सुधार का मतलब यह कतई नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का वोट देने का अधिकार खत्म हो गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मताधिकार को इस तरह कम नहीं किया जा सकता।

47 लाख शिकायतों का निपटारा कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि अब तक प्राप्त 60 लाख आपत्तियों में से लगभग 47 लाख का निपटारा किया जा चुका है। रोजाना 1.75 लाख से 2 लाख मामलों की सुनवाई हो रही है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संतोष व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि 7 अप्रैल तक सभी लंबित शिकायतों का समाधान हो जाएगा।

राजनीतिक दलीलें और कोर्ट का रुख ममता बनर्जी के वकील ने अदालत में चिंता जताई कि नाम कटने की दर 45% तक पहुंच गई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल को अपना काम करने दें। वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि सीईओ कार्यालय में ‘चुपके से’ कुछ नहीं होगा; हर बूथ पर फॉर्म-6 की जानकारी देनी होगी और शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी।

BDO पर गिरी गाज चुनाव आयोग ने अनुशासनहीनता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नदिया जिले के हंसखाली ब्लॉक के बीडीओ (BDO) सायंतन भट्टाचार्य को तुरंत बर्खास्त करने का आदेश दिया है। आरोप है कि चुनावी प्रशिक्षण केंद्र के भीतर एक शिक्षक के साथ मारपीट की घटना के दौरान बीडीओ वहां मौजूद थे। आयोग ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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